संस्‍कृतजगत् संस्‍थानम्

कृपालुपुरम्, नगहरा चौराहा, गोशाईगंज, फैजाबाद, 224141

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संस्‍था संरक्षक महोदय

श्री अनिरुद्धमुनि पाण्‍डेय ''आर्त''

वरिष्‍ठ प्रबन्‍धक ब.उ.प्र. ग्रामीण बैंक

संस्‍था के संरक्षक श्रीमान् अनिरुद्धमुनि पाण्‍डेय जी सम्‍प्रति प्रतापगढ क्षेत्र में वरिष्‍ठ प्रबन्‍धक हैं । ये श्रेष्‍ठ कवि, साहित्‍यकार, विद्वान् और भक्‍त हैं । श्री हनुमन्‍तलाल की इनपर विशेष कृपा है । अपने प्रारम्भिक जीवन में अत्‍यन्‍त कष्‍टपूर्वक जीवन बिताते हुए इन्‍होने आंग्‍लभाषा से परास्‍नातक अयोध्‍या - फैजाबाद के प्रतिष्ठित महाविद्यालय का.सु.साकेत महाविद्यालय से प्रथम श्रेणी में उत्‍तीर्ण किया । परास्‍नातक उत्‍तीर्ण करने के ही वर्ष जब इनकी उर्म मात्र 21 वर्ष थी फैजाबाद क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक में प्रबन्‍धक पद पर नियुक्‍त हुए । इस नियुक्ति को श्री हनुमन्‍तलाल की कृपा मानते हुए पूर्व मानसिक संकल्‍प को पूर्ण करते हुए इन्‍होंने अपने ननिहाल ''बेनीपुर, अम्‍बेडकरनगर (तत्‍कालीन फैजाबाद)'' में श्रीहनुमन्‍तलाल का भव्‍य मन्दिर बनवाया । उस मन्दिर के आसपास सम्‍प्रति बस चुकी बाजार की इन्‍ही के नाम पर अनिरुद्धनगर नाम से प्रसिद्ध हुई ।

श्री अनिरुद्धमुनि पाण्‍डेय जी उत्‍कृष्‍ट कोटि के कवि भी हैं । इन्‍होने श्रीहनुमच्‍चरितामृत नामक हिन्‍दी महाकाव्‍य लिखा जो रामकथा को नवीन रूप में प्रस्‍तुत करता है । इन्‍की अन्‍य रचनाओं में श्री विनयपचीसी, श्री विनयषोडशी, श्री विनयकुंज, नीराजन के साथ साथ हजारों की संख्‍या में भजनसंग्रह, लोकगीतों में कजली, फगुआ आदि रचनाएँ हैं ।

आप उत्‍तम कोटि के गायक भी हैं । आपकी आडियो सीडी भी बाजार में उपलब्‍ध हैं । मुख्‍य भजन संग्रह - वीर हनुमान सुनो, पुष्‍प भजनमाला, बिन्‍दु जी के कर्णप्रिय भजन, श्रीदुर्गासप्‍तशती आदि को इन्‍होने अपने सुन्‍दर स्‍वरों से सजाया है । आप हारमोनियम के सिद्धहस्‍त वादक हैं । हारमोनियम के साथ जब आप श्री भगवद्भक्ति के गीत गाते हैं तो सुनने वालों की आत्‍मा तृप्‍त हो जाती है ।

इतने उॅचे पद पर होते हुए भी आपको अभिमान ने छुआ तक नहीं है । जो कुछ भी है सब श्री हनुमन्‍त का है यही आपकी सर्वकालिक सोच है ।

आपकी सज्‍जनता तथा विद्वता के विषय में बताने में सामान्‍य मनुष्‍य की लेखनी अक्षम है अत: संक्षेप में ही आपके कार्य-व्‍यवहारों का प्रस्‍तुतीकरण यहाँ किया गया है ।

सारसंक्षेप

व्‍यक्तित्‍व

  • वरिष्‍ठ प्रबन्‍धक (ब.उ.प्र.ग्रामीण बैंक)
  • महाकवि
  • उत्‍कृष्‍ट गायक
  • श्रेष्‍ठभक्‍त
  • सादगीपसंद
  • योगाभ्‍यासी
  • उत्तम हारमोनियम वादक
  • श्रेष्‍ठ व कुशल वक्‍ता
  • विद्वद्वरिष्‍ठ (श्रीरामचरितमानस,
  • श्रीमद्भगवद्गीता, वेदान्‍त आदि ग्रन्‍थों का गूढ ज्ञान व हजारों संस्‍कृतग्रन्‍थों का अध्‍ययन)

कृतित्‍व

  • काव्‍यक्षेत्र
  • श्रीहनुमच्‍चरितामृत (महाकाव्‍य)
  • नीराजन (भजनसंग्रह)
  • श्रीविनयपचीसी (हनुमत् सुमिरिनी)
  • श्रीविनयषोडशी (हनुमत् सुमिरिनी)
  • श्री विनयकुंज (विनयपचीसी, विनयषोडशी व भजनसंग्रह )
  • लोकगीतसंग्रह (कजली, फाग, मनहरवा व अन्‍य लोकगीत संग्रह)
  • फागसंग्रह (होलीफाग संग्रह)

गायन

  • बिन्‍दुभजनमाला
  • श्रीदुर्गासप्‍तशती
  • वीर हनुमान सुनो
  • पुष्‍पभजनमाला
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संस्‍थाध्‍यक्ष महोदय

डॉ. विवेकानन्‍द पाण्‍डेय ''आनन्‍द''

संस्‍कृत प्रवक्‍ता श्रीमती सत्‍यवती देवी महाविद्यालय, अम्‍बेडकरनगर

इस संस्‍था के संस्‍थापक डॉ. विवेकानन्‍द पाण्‍डेय जी का जन्‍म फैजाबाद जिले के एक छोटे से ग्राम - ईशापुर में हुआ । बाल्‍यकाल से ही इन्‍हे विद्वज्‍जनों का सानिध्‍य व सत्‍संग प्राप्‍त हुआ जिसके फलस्‍वरूप बाल्‍यकाल से ही ये बुद्धिमत्‍ता व सच्‍चरित्रता इन्‍हे विरासत में प्राप्‍त हुई । पिता श्री अनिरुद्धमुनि पाण्‍डेय के पावन सान्निध्‍य से इनमें बाल्‍यकाल से ही काव्‍यप्रतिभा का प्रस्‍फुटन हुआ । इनकी प्रारम्भिक शिक्षा स्‍थानीय बाजार महबूबगंज, उच्‍च व उच्‍चतरमाध्‍यमिक शिक्षा गोशाईगंज बाजार से तथा उच्‍चशिक्षा (स्‍नातक, परास्‍नातक) लखनउ विश्‍वविद्यालय से सम्‍प‍न्‍न हुई । संस्‍कृत विषय में रुचि व गति के कारण शोधकार्य भी संस्‍कृतविषयाधिकृत्‍य डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्‍वविद्यालय से सम्‍पन्‍न हुआ ।

सन् 2009 में आपने संस्‍कृतं-भारतस्‍य जीवनं नामक एक आनलाइन उपक्रम प्रारम्‍भ किया जिसका ध्‍येय संस्‍कृत का आनलाइन प्रचार-प्रसार करना था । कुछ महीनों में ही लोगों की रुचि को देखते हुए संस्‍कृतं-भारतस्‍य जीवनं ब्‍लाग को संस्‍कृतजगत् नाम दिया गया जो अद्यावधि प्रचलित है । आनलाइन प्रयत्‍नों की अपार सफलता से उत्‍साहित संस्‍कृत सेवा को धरातल पर लाने के लिये इन्‍होने 2010 में स्‍थानीय लोगों व अपने मित्रों के साथ एक अपंजीकृत समिति का गठन किया जिसका नाम भी ''संस्‍कृतजगत्'' ही रखा । इस अनौपचारिक संगठन को सन् 2012 में पं ''संस्‍कृतजगत् सेवा समिति'' नाम से पंजीकृत कर औपचारिक समिति का स्‍वरूप प्रदान किया गया । तब से यह संस्‍था संस्‍कृत व समाज की सेवा में निरन्‍तर योग प्रदान कर रही है । इस संस्‍था के द्वारा संस्‍कृतज्ञों व संस्‍कृतक्षेत्र के छात्रों को संगणक (कम्‍प्‍यूटर) व तकनीकि की शिक्षा भी प्रदान की जाती है जिससे कि संस्‍कृत के छात्र आधुनिक संसार में स्‍वयं को हीन न समझें व समाज के कदम से कदम मिलाकर चल सकें ।

छात्रों के तकनीकिज्ञान को बढाने व संस्‍कृत के छात्रों को तकनीकि में भी सिद्धि प्राप्‍त कराने के उद्देश्‍य से ही आपने संस्‍कृतजगत् कम्‍प्‍यूटर प्रशिक्षण संस्‍थान का प्रारम्‍भ सन् 2012 में किया । इस संस्‍थान में सम्‍प्रति छात्रों को विभिन्‍न कम्‍प्‍यूटर पाठ्यक्रम व वेब डिजाइनिंग सिखाई जाती है ।

आप उत्‍तम कवि भी हैं । आपकी काव्‍य प्रतिभा आनुवंशिक है । आपने कई रचनाएँ की हैं जो अभी तक अप्रकाशित हैं । आप प्रखर राष्‍ट्रवादी हैं ।

आपने पिता के ही पगचिन्‍हों पर चलते हुए गायन में भी हाथ आजमाया है । आपकी एकमात्र प्रकाशित भजनसीडी - रामकृष्‍ण हरे है जो आनलाइन भी उपलब्‍ध है ।

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प्रबन्‍धक महोदय

श्री सुनीलकुमार दूबे

कम्‍प्‍यूटर प्रवक्‍ता, कृषक इण्‍टर कालेज, रामपुर भगन, फैजाबाद

श्री सुनील कुमार दूबे जी सम्‍प्रति इस संस्‍था के प्रबन्‍धक हैं । ये बढे ही योग्‍य व कर्मठ व्‍यक्ति हैं । इनकी उच्‍च शिक्षा लखनउ विश्‍वविद्यालय से सम्‍पन्‍न हुई । बाद में पीजीडीसीए करके इन्‍होने कृषक इण्‍टरकालेज रामपुर भगन फैजाबाद में कम्‍प्‍यूटर के प्रवक्‍ता पद को सुशोभित किया ।

आप कम्‍प्‍यूटर के अच्‍छे ज्ञाता व बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं । आप का विनम्र स्‍वभाव लोगों को आप से जोडे रखता है । आप के प्रबन्‍धन में संस्‍था दिन दूनी रात चौ‍गुनी प्रगिति कर रही है ।

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One more comment for second postVivekanand 10/03/2017

This is a good blog post.Vivekanand 10/03/2017

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